
मंडी। स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण और राशन कोटे में की गई कटौती के खिलाफ वाम संगठनों ने मंडी में प्रदर्शन किया। इस मौके पर सीटू, किसान सभा, नौजवान सभा, जनवादी महिला समिति और एसएफआई ने रैली निकालकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में सीटू के जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह, महासचिव राजेश शर्मा, उपाध्यक्ष रविकांत, सह सचिव नरेश कुमार, किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष परस राम, सह सचिव गोपेंद्र शर्मा, जोगिंद्र वालिया, परमानंद शर्मा, बेली राम भाटिया, रमेश गुलेरिया, महिला समिति की जिला प्रधान हरदीप कौर, सचिव जैंवती शर्मा, गीता देवी, रीता देवी, सुनीता देवी, नौजवान सभा के धार सिंह, अजय वैद्य और एसएफआई के बुद्धि सिंह, चेतन ठाकुर, लोकपाल सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
वाम संगठनों ने सेरी मंच से उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकालकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेजा गया। मांग पत्र के माध्यम से सरकार ने अस्पतालों में होने वाले विभिन्न परीक्षणों को एक निजी कंपनी को ठेके पर सौंपने का कड़ा विरोध किया गया क्योंकि प्रदेश की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है और धीरे-धीरे इन जरूरी सेवाओं को एक-एक करके निजी हाथों को सौंप रही है। इसके अलावा सरकार ने प्रदेश की जनता को मिलने वाले सस्ते राशन के कोटे में भी कटौती कर दी है। खाद्य सुरक्षा कानून बनने के बाद अब केवल बीपीएल परिवारों को ही सस्ता राशन देने का प्रावधान है। इसके तहत उन्हें प्रति व्यक्ति दो किलो चावल और तीन किलो गेहूं मिलेगा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भोजन का अधिकार कानून केवल जनता की आंखों में धूल झोंकना है। जनता की मांग है कि एपीएल-बीपीएल की श्रेणियों के बजाय सभी परिवारों को डिपुओं के माध्यम से 35 किलो राशन प्रतिमाह उपलब्ध करवाया जाए। वाम संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया और राशन सभी को उपलब्ध न करवाया तो सभी संगठन संघर्ष को और तेज करेंगे। इसके तहत 15 से 31 दिसंबर तक जन जागरण यात्रा और जनवरी माह में खंड व क्षेत्रीय स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
